Ibn Manẓūr, Lisān al-ʿArab لسان العرب لإبن منظور

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302. باج5 303. بالام3 304. ببب4 305. ببر8 306. ببس4 307. ببل5308. ببم2 309. ببن4 310. بتأ4 311. بتا2 312. بتت15 313. بتر19 314. بترد1 315. بتع12 316. بتك13 317. بتل18 318. بتم5 319. بثأ3 320. بثا2 321. بثث12 322. بثر13 323. بثط4 324. بثع7 325. بثعر2 326. بثق15 327. بثل3 328. بثن11 329. بجا5 330. بجج10 331. بجح14 332. بجد10 333. بجر13 334. بجرم4 335. بجس17 336. بجل17 337. بجم9 338. بحت15 339. بحتر4 340. بحث15 341. بحثر8 342. بحح11 343. بحدر2 344. بحدل3 345. بحر16 346. بحرت2 347. بحزج3 348. بحشل3 349. بحظل4 350. بحل3 351. بحلس3 352. بحم3 353. بحن8 354. بخا4 355. بخت13 356. بختج4 357. بختر12 358. بخثر2 359. بخثع1 360. بخخ8 361. بخدج3 362. بخدق1 363. بخدن3 364. بخذع1 365. بخذم1 366. بخر15 367. بخز3 368. بخس17 369. بخص10 370. بخع15 371. بخق13 372. بخل14 373. بخلص1 374. بخن3 375. بخند5 376. بخنق5 377. بخنك1 378. بدأَ2 379. بدا8 380. بدج3 381. بدح7 382. بدخ4 383. بدد16 384. بدر19 385. بدس4 386. بدع19 387. بدغ9 388. بدل18 389. بدن18 390. بده16 391. بذأ11 392. بذا6 393. بذبن3 394. بذج6 395. بذح5 396. بذخ12 397. بذذ10 398. بذر17 399. بذرج3 400. بذرق3 401. بذع5 Prev. 100
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ببل: بابل: موضع بالعراق، وقيل: موضع إِليه يُنْسب السِّحرُ والخمر، قال

الأَخفش: لا ينصرف لتأْنيثه وذلك أَن اسم كل شيء مؤنث إِذا كان أَكثر من

ثلاثة أَحرف فإِنه لا ينصرف في المعرفة، قال الله تعالى: وما أنزل على

الملكين ببابل؛ قال الأَعشى:

ببابِلَ لم تُعْصَر، فجاءت سُلافَةً

تُخالِطُ قِنْدِيداً، ومِسْكاً مُخَتَّما

وقول أَبي كبير الهذلي يصف سهاماً:

يَكْوِي بها مُهَجَ النفوس، كأَنَّما

يَكْوِيهِمُ بالبابِلِيّ المُمْقِرِ

قال السُّكَّري: عنى بالبابليّ هنا سُمّاً. وفي حديث عليّ، كرم الله

وجهه: إِن حِبِّي نهاني أَن أُصلي في أَرض بابِلَ فإِنها ملعونة؛ بابِلُ:

هذا الصُّقْع المعروف بأَرض العراق، وأَلفه غير مهموزة؛ قال الخطابي: في

إِسناد هذا الحديث مقال، قال: ولا أَعلم أَحداً من العلماء حَرَّمَ الصلاة

في أرض بابل، ويشبه إِن ثبت هذا الحديث أَن يكون نهاه أَن يتخذها وَطَناً

ومُقاماً، فإِذا أَقام بها كانت صلاته فيها، قال: وهذا من باب التعليق

في علم البيان أَو لعل النهي له خاصة، أَلا تراه قال: نهاني؟ ومثله حديثه

الآخر: نهاني أَن أَقرأ ساجداً وراكعاً ولا أَقول نهاكم، ولعل ذلك إِنذار

منه بما لقي من المحنة بالكوفة، وهي من أَرض بابل.

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