54759. بنصَالح1 54760. بنصِدِّيق1 54761. بِنْصَر1 54762. بِنْصِر1 54763. بنصر5 54764. بِنْصره الأيمن154765. بنصَغِير1 54766. بنط4 54767. بُنْط1 54768. بنطاسيا2 54769. بنطس1 54770. بنطلون1 54771. بنظ1 54772. بنَظَري1 54773. بنعَطَا الله1 54774. بنعَطَّار1 54775. بنعَطِيَّة1 54776. بنعك1 54777. بنعلَّة1 54778. بنعُلُوّ1 54779. بنعُلْو1 54780. بنعَلِيّ1 54781. بنعَمَارة1 54782. بنعَمَّارة1 54783. بنعُمَر1 54784. بنعَمْران1 54785. بنعَمْرو1 54786. بَنَفْسِج1 54787. بنفسج4 54788. بَنَفْسَج1 54789. بِنَفْسِه1 54790. بنفيش1 54791. بنق11 54792. بَنَقَ 1 54793. بِنِّقاجة1 54794. بنقس2 54795. بنقص2 54796. بَنْك1 54797. بنك8 54798. بنك وباده1 54799. بَنَكَ 1 54800. بِنْكَاوِي1 54801. بُنْكَاوِيّ1 54802. بنكت1 54803. بنكث1 54804. بِنْكَدَّة1 54805. بنكرياس1 54806. بنكل1 54807. بنكلي1 54808. بِنْكُلِّيّ1 54809. بِنْكِمْرَة1 54810. بنكنوت2 54811. بنكُور1 54812. بِنْكَوْر1 54813. بنكي1 54814. بَنْكِي1 54815. بِنكِيرَان1 54816. بِنْكَيْرَان1 54817. بنلَمِيح1 54818. بنلَوْح1 54819. بنم4 54820. بنمس1 54821. بنن11 54822. بَنَنَ1 54823. بننسَارِي1 54824. بنه2 54825. بِنْها1 54826. بِنْهَا1 54827. بنها2 54828. بِنَهان1 54829. بنو4 54830. بَنو الأخياف1 54831. بنو الأخياف1 54832. بَنو الْأَعْيَان1 54833. بنو الأعيان1 54834. بنو العلات1 54835. بنو زُهْرَة1 54836. بنو زَهْرَة1 54837. بنو زَيْد1 54838. بنو عَتْوَر1 54839. بنو/بني1 54840. بَنَوَ 1 54841. بُنُوَّة1 54842. بنوتي1 54843. بِنُود1 54844. بنود1 54845. بنودي1 54846. بَنُّور1 54847. بنورَبِيعَة1 54848. بَنُّورة1 54849. بِنْوَشي1 54850. بَنُون1 54851. بَنَوِي1 54852. بَنَوِيَّة1 54853. بِنْوَيْس1 54854. بنى9 54855. بنى الفرس1 54856. بَنَى بِـ1 54857. بني7 54858. بني1 Prev. 100
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بِنْصره الأيمن

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بِنْصره الأيمن
الجذر: ب ن ص ر

مثال: تألَّم من بِنْصره الأيمن
الرأي: مرفوضة عند الأكثرين
السبب: لمعاملة كلمة «بِنْصر» معاملة المذكَّر، وهي مؤنَّثَة.

الصواب والرتبة: -تَأَلَّم من بِنْصره اليُمْنَى [فصيحة]-تَأَلَّم من بِنْصره الأيمن [صحيحة]
التعليق: ذكرت المعاجم القديمة والحديثة كالقاموس واللسان والتاج والوسيط أن كلمة «بِنْصر» مؤنثة. فالجملة الأولى فصيحة لاشَكَّ في ذلك. ويمكن تصحيح الاستعمال المرفوض، الذي عوملت فيه الكلمة معاملة المذكر اعتمادًا على أنَّ الكلمة من المؤنث المجازي الخالي من علامة التأنيث، وهو نوع من المؤنث ذهب كثير من القدماء إلى جواز تذكيره، مثل المبرِّد وابن السكيت والأزهري، وقد حكي عن المبرِّد أنه كان يقول: «ما لم يكن فيه علامة تأنيث وكان غير حقيقي التأنيث فلك تذكيره»، وفي خاتمة المصباح: «والعرب تجترئ على تذكير المؤنث إذا لم يكن فيه علامة تأنيث».
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