Al-Rāghib al-Iṣfahānī, al-Mufradāt fī Gharīb al-Qurʾān المفردات في غريب القرآن للراغب الأصفهاني

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772. شق4 773. شقا4 774. شكا6 775. شكر19 776. شكس18 777. شكك13778. شكل24 779. شمأز2 780. شمت17 781. شمخ16 782. شمس20 783. شمل17 784. شنأ16 785. شها6 786. شهب19 787. شهد17 788. شهر17 789. شهق18 790. شوب17 791. شور21 792. شوظ14 793. شوك18 794. شوى12 795. شيء5 796. شيب17 797. شيخ17 798. شيد17 799. شيط17 800. شيع18 801. شيه6 802. صاح2 803. صاع1 804. صبا8 805. صبب15 806. صبح20 807. صبر21 808. صبغ19 809. صحب15 810. صحف20 811. صخ4 812. صخر13 813. صدد14 814. صدر22 815. صدع20 816. صدف20 817. صدق20 818. صدى9 819. صر6 820. صرح19 821. صرط13 822. صرع16 823. صرف27 824. صرم20 825. صطر7 826. صعد21 827. صعر18 828. صعق17 829. صغا6 830. صغر18 831. صف5 832. صفح19 833. صفد15 834. صفر21 835. صفن21 836. صفو13 837. صلا8 838. صلب19 839. صلح17 840. صلد17 841. صلل13 842. صمد14 843. صمع18 844. صمم17 845. صنع19 846. صنم15 847. صنو10 848. صهر16 849. صوب19 850. صوت16 851. صور20 852. صوغ16 853. صوف17 854. صوم19 855. صيد18 856. صير17 857. صيص10 858. صيف18 859. ضأن11 860. ضاهى1 861. ضبح15 862. ضحك17 863. ضحى4 864. ضد5 865. ضر5 866. ضرب23 867. ضرع20 868. ضعف20 869. ضغث18 870. ضغن17 871. ضل5 Prev. 100
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شكك
الشَّكُّ: اعتدال النّقيضين عند الإنسان وتساويهما، وذلك قد يكون لوجود أمارتين متساويتين عند النّقيضين، أو لعدم الأمارة فيهما، والشَّكُّ ربّما كان في الشيء هل هو موجود أو غير موجود؟ وربّما كان في جنسه، من أيّ جنس هو؟ وربّما كان في بعض صفاته، وربّما كان في الغرض الذي لأجله أوجد.
والشَّكُّ: ضرب من الجهل، وهو أخصّ منه، لأنّ الجهل قد يكون عدم العلم بالنّقيضين رأسا، فكلّ شَكٍّ جهل، وليس كلّ جهل شكّا، قال الله تعالى: وَإِنَّهُمْ لَفِي شَكٍّ مِنْهُ مُرِيبٍ [هود/ 110] ، بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ يَلْعَبُونَ [الدخان/ 9] ، فَإِنْ كُنْتَ فِي شَكٍّ [يونس/ 94] .
واشتقاقه إمّا من شَكَكْتُ الشيء أي: خرقته، قال:
وشككت بالرّمح الأصمّ ثيابه ليس الكريم على القنا بمحرّم
فكأنّ الشَّكَّ الخرق في الشيء، وكونه بحيث لا يجد الرأي مستقرّا يثبت فيه ويعتمد عليه.
ويصحّ أن يكون مستعارا من الشَّكِّ، وهو لصوق العضد بالجنب، وذلك أن يتلاصق النّقيضان فلا مدخل للفهم والرّأي، لتخلّل ما بينهما، ويشهد لهذا قولهم: التبس الأمر، واختلط، وأشكل، ونحو ذلك من الاستعارات. والشِّكَّةُ: السّلاح الّذي به يشكّ، أي: يفصل.
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